Open Access | Peer-Reviewed | Bi-Monthly

Publisher: Dr. N.M Shah Foundation

ISSN: 3108-0367

DOI Namespace: 10.68013/nuj

सतबीस देवरी की मूर्तिकला में अप्सराओं द्वारा परिलक्षित सामाजिक जीवन

Abstract

मूर्तिकला इतिहास को जानने का महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्रोत है, मूर्तिकला न केवल अतीत के गौरव को प्रतिबिम्बित करने वाला दर्पण है, अपितु धार्मिक व सांस्कृतिक प्रगति के मापदण्ड तथा समकालीन लौकिक जन-जीवन की तस्वीर प्रकट करते हैं। इस शोध पत्र में मैंने समकालीन लौकिक जीवन की एक झांकी प्रस्तुत करने हेतु मंदिर अलंकरण हेतु सतबीस देवरी मंदिर परिसर में मंडोवर तथा सभामण्डप के बाह्य भाग में नारी अलंकरण में विविध अप्सराओं का अंकन किया गया है। जिसमें मातृत्व के प्रतीक हेतु पुत्रवल्लभा, संगीत तथा नृत्य के प्रतीक हेतु सारंगवादिनी, वीणावादिनी, शहनाईवादिनी,श्रृंगारप्रियता हेतु दर्पणा, आलस्य सुन्दरी, हंसावली, पशुप्रेम हेतु शुकसारिका, वानर को भगाती हुई अप्सरा आदि का अंकन किया गया है। इन प्रतिमाओं से हमें तत्कालीन सामाजिक स्थिति तथा नारी की स्थिति का आंकलन करने में सहायता मिलती है।

Keywords

मूर्तिकला, लौकिक जीवन, सतबीस देवरी, मंडोवर, सभामण्डप, अप्सरा, वीणा वादिनी, शुकसारिका, हंसावली, दर्पणा।

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Citation

शंकर बाई मीना, डॉ बीना. सतबीस देवरी की मूर्तिकला में अप्सराओं द्वारा परिलक्षित सामाजिक जीवन. Nexus Universal Journal, Vol. 2, Issue 4, 2026.
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